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शैक्षिक भ्रमण रिपोर्ट: महमूदाबाद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ एक रोमांचक यात्रा आज़ाद कॉलेज

शैक्षिक भ्रमण रिपोर्ट: महमूदाबाद - 2026

शैक्षिक भ्रमण रिपोर्ट

महमूदाबाद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ एक रोमांचक साहसिक यात्रा!
📅 22 जनवरी 2026
📍 महमूदाबाद, सीतापुर
🏛️ आयोजक: बेसिक शिक्षा विभाग

🚀 एक नई शुरुआत: उत्साह का तूफान!

वाह! आज 22 जनवरी 2026 का दिन क्या कमाल का था! बेसिक शिक्षा विभाग, सीतापुर के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय शैक्षिक एक्सप्लोरर विजिट ने सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। सुबह 9:30 बजे बी.एस.ए. ऑफिस, सीतापुर के प्रांगण में लगभग 200 बच्चे उछल-कूद रहे थे, मानो कोई त्योहार हो! डी.सी. कम्युनिटी श्री किसलय अग्निहोत्री जी ने हरी झंडी दिखाकर इस उत्साह भरे सफर को रवाना किया, और बसों में सवार होकर हम निकल पड़े एक ऐतिहासिक साहसिक यात्रा पर!

👨‍🏫 मार्गदर्शक मंडल:
इस यात्रा में बच्चों के साथ बेसिक शिक्षा परिवार के समर्पित सदस्य और शिक्षक – राजकुमार, योगेंद्र पांडेय, बालगोविन्द द्विवेदी, चंद्र प्रकाश भार्गव, चंद्रशेखर, सुरेंद्र, संतोष, आराध्य शुक्ल, मनीष रस्तोगी, निलेश वर्मा, अल्पना वर्मा, दीपक चौधरी, गीता दीक्षित, मनोज, रजनीश कुमार, रेनू वर्मा, महेंद्र, सुधीर कुमार, सुरेंद्र कुमार, विमल, गीता, अनिल, पवन कश्यप, सुधकर, मुशीर अहमद और अन्य शिक्षकगण – सभी मार्गदर्शक की भूमिका में थे।

✨ विशेष: गाइड के रूप में आराध्य शुक्ल जी ने किले की हर कहानी को जीवंत कर दिया!
🎵 यादगार पल: ब्लॉक महोली के शिक्षक बाल गोविंद द्विवेदी जी ने यात्रा के दौरान बांसुरी बजाई, जिसकी मधुर धुनों ने बच्चों का मन पूरी तरह मोह लिया। बच्चे तालियां बजाते हुए झूम उठे!

🏰 1. राजा महमूदाबाद का किला: इतिहास की गूँज

हमारी यात्रा का पहला पड़ाव था महमूदाबाद का भव्य किला (The Qila)। 16वीं शताब्दी में स्थापित यह रियासत स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथाओं से भरी पड़ी है। 1857 के गदर में यहाँ के राजा ने अंग्रेजों के खिलाफ डटकर लड़ाई लड़ी थी।

विशेष आकर्षण: किले के विशाल अस्तबल में 'मारवाड़ी नस्ल' के दो शानदार घोड़े आकर्षण का केंद्र रहे। इनके कान ऊपर की ओर मुड़कर आपस में मिलते हैं, जो इनकी पहचान है।

🏰 महमूदाबाद किले के चित्र यहाँ देखें

🛕 2. संकटा देवी मंदिर परिसर: आस्था का जादू

किले से थोड़ी दूर स्थित संकटा देवी मंदिर परिसर में कदम रखते ही एक जादुई शांति ने हमें घेर लिया। यह उत्तर भारत में संकटा देवी का प्रमुख तीर्थस्थल है।

  • जगन्नाथ मंदिर: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ (लकड़ी) की मूर्तियां।
  • पातालेश्वर महादेव: भूमिगत स्तर पर स्थित शिवलिंग।
  • पवित्र सरोवर: तैरती रंग-बिरंगी मछलियों को देखकर बच्चे मंत्रमुग्ध हो गए।
🛕 महमूदाबाद संकटा देवी मंदिर का चित्र यहाँ देखें

🏫 3. मौलाना आजाद इंटर कॉलेज: शौर्य की मिसाल

यात्रा का अंतिम पड़ाव था मौलाना आजाद इंटर कॉलेज। यहाँ आकर दिल में देशभक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा!

विजयंत टैंक (Vijayanta Tank): कॉलेज के सामने खड़ा 1971 के युद्ध का असली योद्धा (Battle Proven) टैंक बच्चों का फेवरेट बना। यह भारत का पहला स्वदेशी टैंक था। बच्चों ने टैंक को छुआ और सेना के शौर्य को नमन किया।

🎓 महमूदाबाद आजाद कॉलेज कि चित्र यहाँ देखें

🚩 निष्कर्ष: यादों का अनमोल खजाना

शाम ढलते-ढलते हम वापस सीतापुर लौटे, लेकिन दिल अभी भी महमूदाबाद में अटका हुआ था! किले की वीर गाथाएं, मंदिर की शांति, मारवाड़ी घोड़ों का राजसी आकर्षण और बालगोविन्द द्विवेदी जी की बांसुरी की मधुरता – सबने मिलकर बच्चों को एक नई ऊर्जा से भर दिया। जय हिंद!

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