शैक्षिक भ्रमण रिपोर्ट
एक नई शुरुआत: उत्साह का तूफान और रोमांच की लहरें!
वाह! आज 22 जनवरी 2026 का दिन क्या कमाल का था! बेसिक शिक्षा विभाग, सीतापुर के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय शैक्षिक एक्सप्लोरर विजिट ने सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। सुबह 9:30 बजे बी.एस.ए. ऑफिस, सीतापुर के प्रांगण में लगभग 200 बच्चे उछल-कूद रहे थे, मानो कोई त्योहार हो! डी.सी. कम्युनिटी श्री किसलय अग्निहोत्री जी ने हरी झंडी दिखाकर इस उत्साह भरे सफर को रवाना किया, और बसों में सवार होकर हम निकल पड़े एक ऐतिहासिक साहसिक यात्रा पर!
विशेष: गाइड के रूप में आराध्य शुक्ल जी ने किले की हर कहानी को जीवंत कर दिया, मानो हम समय की मशीन में सवार होकर अतीत में घूम रहे हों!
1. राजा महमूदाबाद का किला: इतिहास की जीवंत गूँज
ओहो! हमारी यात्रा का पहला पड़ाव था महमूदाबाद का भव्य किला (The Qila) – यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि अवध के गौरवशाली इतिहास का धड़कता दिल है! 16वीं शताब्दी में स्थापित यह रियासत स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथाओं से भरी पड़ी है। 1857 के गदर में यहाँ के राजा ने अंग्रेजों के खिलाफ डटकर लड़ाई लड़ी, जिससे किले का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। लेकिन आज भी यह सीना ताने खड़ा है।
वास्तुकला की बात करें तो बच्चे लखौरी ईंटों और चूने से बनी मजबूत दीवारों को देखकर हैरान रह गए। किले का इमामबाड़ा अपनी बारीक नक्काशी और अवध शैली की स्थापत्य कला से चमक रहा था। बच्चों ने पुरानी जेल और कचहरी को देखा, जो उस दौर की शासन व्यवस्था और न्याय प्रणाली की रोचक कहानियां सुना रही थीं।
और अब सबसे रोमांचक हिस्सा! किले के विशाल अस्तबल में हमें दो शानदार मारवाड़ी घोड़े मिले – ये राजसी नस्ल के घोड़े हैं, जिनकी उत्पत्ति राजस्थान की मारवाड़ क्षेत्र से है। इन घोड़ों की सबसे बड़ी पहचान इनके कान होते हैं जो ऊपर की ओर मुड़कर आपस में मिलते हैं। इतिहास में मारवाड़ी घोड़े युद्धों में राजाओं के सबसे वफादार साथी रहे हैं। बच्चे इन्हें देखकर उछल पड़े और आराध्य शुक्ल जी ने बताया कि ये घोड़े किले की विरासत का हिस्सा हैं।
🏰 महमूदाबाद किले का चित्र यहाँ देखे2. संकटा देवी मंदिर परिसर: आस्था का जादू
किले से थोड़ी दूर स्थित संकटा देवी मंदिर परिसर में कदम रखते ही एक जादुई शांति ने हमें घेर लिया। यह स्थान महमूदाबाद की आध्यात्मिक आत्मा है। मंदिर सदियों पुराना है और लोककथाओं के अनुसार, इसे अवध के राजाओं का संरक्षण प्राप्त था। यह उत्तर भारत में संकटा देवी का प्रमुख तीर्थस्थल है, जहां संकटों से मुक्ति की कामना की जाती है।
मुख्य मंदिर में माँ संकटा देवी की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन से बच्चों के चेहरे खिल उठे। परिसर में जगन्नाथ मंदिर है, जहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ (लकड़ी) की मूर्तियां पुरी की संस्कृति की याद दिलाती हैं।
इसके अलावा, पातालेश्वर महादेव का प्राचीन शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग भूमिगत स्तर पर है। मंदिर से सटा विशाल पवित्र सरोवर (तालाब) तो असली आकर्षण था – इसमें तैरती रंग-बिरंगी मछलियों को देखकर बच्चे अपनी सुध-बुध भूल गए। यह तालाब प्राचीन जल-प्रबंधन का शानदार उदाहरण है, जहां घाटों की सीढ़ियां और चारों तरफ फैली हरियाली सुकून देती है।
🛕 महमूदाबाद संकटा देवी मंदिर का चित्र यहाँ देखे3. मौलाना आजाद इंटर कॉलेज: शिक्षा और शौर्य
यात्रा का अंतिम पड़ाव था मौलाना आजाद इंटर कॉलेज – यहां आकर तो दिल में देशभक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा! इस कॉलेज की स्थापना राजा महमूदाबाद (मोहम्मद अमीर अहमद खान) ने की थी, जो शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।
कॉलेज के सामने खड़ा विजयंत टैंक बच्चों का फेवरेट बना – यह 1971 के भारत-पाक युद्ध का असली योद्धा (Battle Proven) टैंक है। विजयंत टैंक भारत का पहला स्वदेशी टैंक था, जिसने बसंतर की लड़ाई में पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे। बच्चे टैंक पर चढ़े, उसकी तोपों को छुआ और सेना के शौर्य की कहानियां सुनीं। पास ही शहीद स्मारक पर हमने उन वीरों को सलाम किया जिन्होंने देश की रक्षा की।
🏫 महमूदाबाद आजाद कॉलेज कि चित्र यहाँ देखेनिष्कर्ष: यादों का अनमोल खजाना
शाम ढलते-ढलते हम वापस सीतापुर लौटे, लेकिन दिल अभी भी महमूदाबाद में अटका हुआ था! यह यात्रा सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि इतिहास की किताबों से निकलकर अपनी जड़ों को छूने का अवसर थी। किले की वीर गाथाएं, मंदिर की शांति, मारवाड़ी घोड़ों का राजसी आकर्षण, बालगोविन्द द्विवेदी जी की बांसुरी की मधुरता और विजयंत टैंक का शौर्य – सबने मिलकर बच्चों को एक नई ऊर्जा से भर दिया।
बेसिक शिक्षा विभाग का यह प्रयास निश्चित रूप से बच्चों के मानसिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक विकास में एक चमकदार मील का पत्थर बनेगा। अगली यात्रा का इंतजार रहेगा – जय हिंद!






















































