पंचलाइट: गोधन की कहानी
कहानी का सारांश
फणीश्वर नाथ 'रेणु' की मशहूर आंचलिक कहानी — जहाँ एक पेट्रोमैक्स लैंप (पंचलाइट) पूरे गाँव की इज्जत और संकीर्णता का प्रतीक बन जाता है। गोधन की चतुराई से गाँव की मर्यादा बचती है।
- पंचलाइट खरीदा: 15 महीने जुर्माने के पैसे जोड़कर रामनवमी मेले से लाया गया आधुनिक लैंप।
- मुसीबत: लैंप तो है, पर जलाना किसी को नहीं आता — गाँव की सारी इज्जत दाँव पर।
- गोधन बहिष्कृत: मुनरी से प्रेम के कारण हुक्का-पानी बंद।
- चतुराई: मजबूरी में गोधन को बुलाया — उसने लैंप जला दिया और सबकी लाज रख ली।
"तुम्हारा सात खून माफ़, खूब गाओ सलीमा का गाना!"
— पंच (दोहरी नैतिकता का तीखा व्यंग्य)
— पंच (दोहरी नैतिकता का तीखा व्यंग्य)
संदेश: रूढ़ियाँ कितनी भी मजबूत हों, असली ज़रूरत उन्हें तोड़ देती है। हर इंसान की अपनी उपयोगिता होती है।

